नई शिक्षा नीति से क्या उम्मीदें?

भारत सरकार ने नई शिक्षा नीति 2020 की घोषणा की। 1986 के बाद शिक्षा नीति में बदलाव किया जा रहा है। जोकि आज के परिप्रेक्ष्य के हिसाब से बेहद ज़रूरी था। शिक्षा नीति में बदलाव बहुत पहले जो जाना चाहिए था लेकिन देर आए दुरुस्त आए। मैं इस कदम को मोदी सरकार का सबसे बड़ा कदम मानता हूं।

दुनिया के बाकी देशों से तुलना करें तो हमारी शिक्षा पद्धति बहुत ही आउटडेटेड हो चुकी है। जहां दुनिया के विकसित देश पढ़ाई में व्यावहारिक ज्ञान, जिज्ञासा, नवाचार जैसी चीजों को महत्व दे रहे हैं, वहीं हमारी शिक्षा पद्धति सिर्फ किताबें रटने तक सीमित है। यही वजह है कि हमारा देश दुनिया में सबसे अधिक प्रतिभाशाली दिमाग पैदा करने के बाद भी प्रोद्योगिकी, रिसर्च तथा इन्नोवेशन में इतना पिछड़ा हुआ है। नतीजतन आज हमें एक मोबाइल फोन से लेकर लड़ाकू जहाज तक के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
आज देश को असल में शिक्षा क्रांति की आवश्यकता है। और इसके लिए जरूरी है शिक्षा पद्धति में बदलाव। बदलाव सिर्फ इस उद्देश्य से नहीं कि हम प्रोद्योगिकी, रिसर्च तथा इन्नोवेशन में दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले खड़े हो सके, बल्कि इसलिए भी ताकि हम समाज में फैली कुरीतियों को दूर करके एक बेहतर समाज की स्थापना कर सके। यह तभी होगा जब हमारी शिक्षा प्रणाली बच्चों को जिज्ञासु, तार्किक बनाने के साथ साथ उनमें नैतिक मूल्यों का भी सृजन कर सके।
नई शिक्षा पद्धति से क्या उम्मीद की जा सकती है?
नई शिक्षा की एक सबसे महत्वपूर्ण बात है कॉलेज में मल्टीपल एंट्री एग्जिट का विकल्प।
वहीं स्कूली शिक्षा में बहुत सुधार की आवश्यकता थी। जिसके लिए स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम में परिवर्तन करना बेहद ज़रूरी है।
नई शिक्षा नीति के अंतर्गत स्कूली पाठ्यक्रम में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए जाने हैं। जिसमें कम उम्र में ही बच्चे की जिज्ञासा, तार्किक क्षमता, नैतिक मूल्य और व्यवहार, आर्ट्स एंड क्राफ्ट इत्यादि क्षमताओं को बढ़ाने की बात कही गई है। इसके अतिरिक्त बच्चों के बैग का बोझ कम करना और विषय सामग्री को कोर एसेंशियल तक सीमित करने पर विचार किया गया है। इसके साथ ही स्कूल परीक्षाओं के ढांचे को बदलना भी बेहद जरूरी है। जिससे बच्चे परीक्षा के तनाव से हटकर तर्क, इनोवेशन और दूसरी क्षमताओं पर ध्यान दें।
इसके अतिरिक्त खेल तथा व्यावसायिक कोर्स को सम्मिलित करने का भी प्रावधान है। खेल सिर्फ शारीरिक रूप से स्वस्थ होने के लिए ही ज़रूरी नहीं है बल्कि खेलों से बच्चों के अंदर नेतृत्व क्षमता, टीम वर्क, धैर्य इत्यादि ऐसी स्किल्स विकसित की जाती जिन्हें पढ़कर तैयार नहीं किया जा सकता। इसलिए खेलों का पढ़ाई में बराबर का महत्व है। नई शिक्षा नीति खेलों को पाठ्यक्रम में बराबर का
महत्व देने की बात कहती है।
कुल मिलाकर नई शिक्षा नीति वर्तमान की जरूरत के हिसाब से हमारी शिक्षा नीति में बदलाव के लिए एक विजन पेश करती है। ज़रूर इसमें बहुत सी कमियां होंगी जिन्हें दूर करने के लिए सरकार को यथासंभव  कोशिश करनी होगी। इसके लिए सभी लोगों और राजनीतिक दलों को अपने सुझाव सरकार के सामने रखने चाहिए।
लेकिन इस देश में अक्सर नीतियां बनती हैं लेकिन धरातल तक नहीं पहुंच पाती। तो नीति को बनाने से बड़ी चुनौती इस नीति को देश भर में लागू करने की रहेगी। लागू करने से पहले कक्षाओं और ज़रूरत के मुताबिक पाठ्यक्रम बनाना, उसमें खेल और दूसरी गतिविधियों को सम्मिलित करना और अध्यापकों को इस नई व्यवस्था के लिए तैयार करना भी बहुत चुनौतीपूर्ण होगा। उम्मीद है कि इस क्रांति में सभी राजनीतिक दल, अधिकारी, अध्यापक व जनता यथासंभव योगदान देगी जिससे आने वाले भविष्य के लिए एक अच्छी शिक्षा व्यवस्था की नींव रखी जा सके।